➤ हिमाचल के राशन डिपुओं में सरसों का तेल 19 रुपये प्रति लीटर महंगा, अब 179 रुपये चुकाने होंगे
➤ एपीएल कार्ड धारकों को राहत, नवंबर से आटे का कोटा 13 से बढ़ाकर 14 किलो
➤ सात महीने से रिफाइंड नहीं, उपभोक्ताओं को मिल रहा केवल दो लीटर सरसों का तेल
हिमाचल प्रदेश के सरकारी राशन डिपुओं में इस महीने उपभोक्ताओं को सरसों का तेल 19 रुपये महंगा मिलेगा। अब एक लीटर तेल के लिए 160 रुपये के बजाय 179 रुपये चुकाने होंगे। इससे तेल के दामों में सीधे 19 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। लगातार बढ़ रही महंगाई के बाद अब राशन डिपुओं से तेल लेने वाले उपभोक्ताओं की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
हिमाचल प्रदेश में कुल 19.5 लाख उपभोक्ता हैं। प्रदेश में एक महीने में लगभग 30 हजार लीटर सरसों के तेल की खपत होती है। पिछले लगभग सात महीनों से रिफाइंड न मिलने के कारण उपभोक्ताओं को दो लीटर सरसों का तेल ही उपलब्ध करवाया जा रहा है। इस बार गोकुल एग्री इंटरनेशनल लिमिटेड और शक्ति न्यूट्रिशंस प्राइवेट लिमिटेड को सरसों के तेल के टेंडर दिए गए हैं।
बाजारों में तेल के दाम बढ़ने के बाद अब निगम की ओर से डिपुओं में भी तेल के दामों में बढ़ोतरी की गई है। वहीं, एपीएल श्रेणी के राशन कार्ड धारकों को राहत देते हुए आटे का कोटा भी बढ़ाया गया है। अब उन्हें पहले के मुकाबले एक किलो अतिरिक्त आटा मिलेगा। अक्तूबर महीने में उपभोक्ताओं को 13 किलो आटा दिया गया था, इसे नवंबर महीने से बढ़ाकर 14 किलो किया गया है।
खाद्य आपूर्ति निगम के जीएम अरविंद्र शर्मा के अनुसार, बाजारों में सरसों के तेल में दाम बढ़ने के कारण डिपुओं में भी सरसों के तेल में बदलाव किया गया है। निगम की ओर से कम दामों वाली कंपनी के साथ ही टेंडर किए गए हैं। बावजूद इसके तेल के दाम 179 रुपये लीटर निर्धारित किए गए हैं।
दो लीटर तेल लेने वाले परिवार पर इस बढ़ोतरी का सीधा असर करीब 38 रुपये प्रति माह के अतिरिक्त खर्च के रूप में पड़ेगा। यानी जहां पहले दो लीटर के लिए 320 रुपये देने पड़ते थे, अब 358 रुपये देने होंगे। सीमित आय वाले परिवारों के लिए रसोई का बजट संभालना और कठिन हो सकता है।
उपभोक्ताओं के लिए जरूरी जानकारी: सरसों का तेल खरीदते समय पैकेट या बोतल पर एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर, पैकिंग तिथि और एक्सपायरी डेट जरूर जांचें। खुला या बिना ब्रांड का तेल लेने से बचें, क्योंकि महंगाई के दौर में मिलावट की आशंका बढ़ जाती है। शुद्धता को लेकर संदेह हो तो खाद्य सुरक्षा विभाग को शिकायत की जा सकती है। राशन डिपो से मिलने वाले सामान की मात्रा और दाम की रसीद लेना भी उपभोक्ता का अधिकार है, इसलिए रसीद जरूर लें और दर सूची से मिलान करें। रसोई का खर्च कम रखने के लिए तेल का सीमित और नापकर उपयोग करना भी लाभदायक रहता है।



